छात्रावास
कलाक्षेत्र एक एक विद्यार्थी का कहना “हम यहां केवल नृत्य और संगिअ ही नहीं सीखते । हम जीवन के नवीन पथ को भी समझते हैं ।“ नृत्य की हर भंगिमा तथा संगीत का शुद्ध ज्ञान इस परिसर में जीवन के हर पहलू को छूता है । सादगी, अनुसासन सभी जीवों के प्रति सद्भाव दिन भर की गतिविधियों में समाहित है यहाँ तक कि अधिकांश सांसारिक क्रियाकलापों का भी ।
विद्यार्थी प्रात: काल उठते हैं, स्नान करते हैं तथा अपनी नृत्य साडी और धोती कुर्ता पायजामा तथा पावाडै दावनी पहनती हैं । सुबह ७.३० को नाश्ता एक बडे हाल में परोसा जाता है जहाँ समुद्र की हवाएँ चलती हैं । दिन के प्रथम भोजन से पुर्व एक छोटी प्रार्थना ईश्वर को धन्यवाद देते हुए बोली जाती है । दक्षिण भारतीय ढंग से सभी लोग जमीन पर बैठकर नाश्ता करते हैं ।
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पैंतालीस मिणिट के पश्चात सभी युवक युवतियां, लडके लडकियां अपने कालेज तथा स्कूल की राह लेते हैं जहां पेडों के नीचे आने वाले दिन के लिए संगीत तथा प्रार्थना की तैयारी होती है । भारत के विभिन्न भागों तथा विश्व के विभिन्न देशों के युवा यहां छात्रावास में रहते हैं । जो पाँच एकड क्षेत्र में घने वृक्षों तथा समुद्र के किनारे स्थित है । विद्यार्थी आधुनिक शौचालय व्यवस्था से युक्त हवादार शयनागार में रहते हैं । जिनमें से कुछ में से समुद्र को देखा जा सकता है । एक कमरे में कालेज के तीन विद्यार्थी रहते ह
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